हमेशा प्रासंगिक रहेंगे डॉक्टर अंबेडकर

आज डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की 125वीं जयंती है। इस मौके पर पूरा देश उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है। देश के अलग-अलग हिस्सों में विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है। भारत को संविधान देने वाले नायक डॉक्टर अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्यप्रदेश के महू में हुआ था। उनके पूर्वज लंबे समय तक ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना में कार्यरत थे।

बचपन से ही मेधावी थे डॉक्टर अंबेडकर

डॉक्टर अंबेडकर का परिवार मराठी था। महार जाति में जन्मे डॉक्टर अंबेडकर को शुरुआती शिक्षा के दौरान काफी मुश्किलें उठानी पड़ी। लेकिन पिता रामजी मालोजी सकपाल के प्रोत्साहन की वहज से तमाम बाधाओं को पार करते हुए डॉक्टर अंबेडकर ने विधि, अर्थशास्त्र व राजनीति विज्ञान में अपने अध्ययन और अनुसंधान के कारण कोलंबिया विश्वविद्यालय और लंदन स्कूल ऑफ इकॉनॉमिक्स से कई डॉक्टरेट डिग्रियां भी अर्जित कीं।  उन्होंने दलितों और गरीबों के उत्थान के लिेए आजीवन संघर्ष किया।

महत्वपूर्ण रचनाएं

डॉक्टर अंबेडकर ने कई महत्वपूर्ण किताबें लिखी हैं जिनके जरिए वर्तमान एवं तत्कालीन राजनीति और समाज को समझने में काफी मदद मिलती है। उनकी रचनाओं में- हू इज शुद्रा,एनिहिलेशन ऑफ कास्ट, आयडिया ऑफ नेशन, गांधी एण्ड गांधीइज्म कुछ प्रमुख हैं। छुआछूत और जातिवाद के घोर विरोधी डॉक्टर अंबेडकर ने बाद में बौद्ध धर्म स्वीकार कर लिया था। इसके बाद उन्होंने लगभग 50 लाख समर्थकों को बौद्ध धर्म में परिवर्तित किया। संविधान निर्माण, दलित उत्थान और राजनीतिक योगदान के लिए उन्हें 1990 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

प्रासंगिक रहेंगे डॉक्टर अंबेडकर

उनकी जयंती के अवसर पर देश भर में कार्यक्रम और सभाएं आयोजित करके उन्हें याद किया जा रहा है। जन्म के 125 वर्ष बाद डॉक्टर अंबेडकर की जयंती को समरसता दिवस के रूप में मनाया जाना ये साबित करता है कि वो हमेशा प्रासंगिक रहेंगे।

 

 

 

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